आध्यात्मिक जागृति समागम में मथुरा के निरंकारियों ने लिया भाग
आध्यात्मिक जागृति समागम में मथुरा के निरंकारियों ने लिया भाग
-आध्यात्मिक जागृति को वास्तविक जीवन का आधार-सतगुरु माता सुदीक्षा
मथुरा । प्रेम, सेवा, समर्पण, सत्य ज्ञान से ओतप्रोत 79 वां निरंकारी संत समागम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया जिसमें चारों दिन लगातार समागम के मुख्य विषय ‘जागृति’ पर आधारित संदेश दिया गया, सत्गुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित की पावन छत्र छाया में हरियाणा के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में 650 एकड़ के विशाल मैदान पर 23 अक्तूबर से शुरू हुए संत समागम में पूरे भारतवर्ष एवं विदेशों के लाखों भक्तों सहित ब्रज क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु मथुरा जोन के जोनल इंचार्ज श्री एच के अरोड़ा के साथ सम्मिलित होकर आध्यात्मिक जागृति की अविरल सरिता में डूबकी लगाकर अनुठे आनंद से लाभान्वित हुए ।.jpg)
मीडिया प्रभारी किशोर स्वर्ण ने बताया कि मथुरा के सेवादार भक्तों ने समागम में सेवादल रैली, निरंकारी प्रदर्शनी, लंगर, रेलवे काउंटर, प्रेस एवं पब्लिसिटी, प्रचार विभाग, ज्ञान कक्ष आदि स्थानों पर अपनी सेवाएं दी, मथुरा से गए निरंकारी भक्त, सत्गुरू के आशीर्वचनों के रूप में प्राप्त दिव्य शिक्षाएं एवं आनंद समेटे हुए बुधवार को वापस लौटे हैं, समागम में विश्वभर से पहुंचे विशाल मानव परिवार को सम्बोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि वास्तविक आध्यात्मिक जागृति केवल विचारों या दिखावे तक सीमित नहीं होती, बल्कि हमारे व्यवहार, आचरण और सामाजिक कर्तव्यों में भी प्रकट होनी चाहिए, यह जागृति किसी एक क्षण या अवसर की बात नहीं, बल्कि जीवनभर बनाए रखने वाला भाव है ।(67).jpg)
सतगुरु माता ने समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, परिवार, समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए एक जागरूक वैश्विक नागरिक बनना चाहिए, जाति-पाति, भाषा, क्षेत्र अथवा स्वभाव के अंतर से ऊपर उठकर प्रत्येक इंसान को प्रेम, सम्मान और अपनत्व के भाव से स्वीकार करना ही सच्ची मानवता है, उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति जीवनभर सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है, यह जागृति हमारे व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए, अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय हमें अपने उद्देश्य को अवश्य परखना चाहिए कि हमारा प्रयास वास्तव में भलाई के लिए है या अहंकार, स्वार्थ और दिखावे के लिए विचारों में भिन्नता होने पर भी प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश देखकर उसे अपनाना ही निष्काम प्रेम की सच्ची पहचान है ।
समागम में निरंकारी राजपिता रमित ने जागरूकता का संदेश देते हुए समझाया कि जीवन में जहाँ परिवर्तन संभव हो, वहाँ सकरात्मक प्रयास करने चाहिए और जहाँ परिवर्तन असंभव हो, वहाँ परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए, कहा कि मनुष्य संसार की आवश्यकताओं और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति तो सजग रहता है लेकिन अक्सर अपनी आत्मा की वास्तविक प्यास को अनदेखा कर देता है, परमात्मा के प्रेम और उसकी सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना तथा सच्ची जिज्ञासा, श्रद्धा और समर्पण के साथ जीवन व्यतीत करना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है, समागम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु के पावन आशीष को प्राप्त किया, वहीं कई पार्षदों, विधायकों, सांसदों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के पावन दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया, इस अवसर पर चिश्ती फाउंडेशन द्वारा सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया ।














