बाजना में बंदरों का बढ़ा आतंक, आयेदिन हो रहीं हैं घटना
बाजना में बंदरों का बढ़ा आतंक, आयेदिन हो रहीं हैं घटना
-कस्बावासियों का छतों पर जाना हुआ मुश्किल, मासूम बच्चों में दहशत
बाजना । नगर पंचायत में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है, स्थिति यह हो गई है कि लोगों का अपने घरों की छतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है, बंदर आए दिन किसी न किसी बड़ी घटना को अंजाम दे रहे हैं जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत और आक्रोश व्याप्त है ।.jpg)
स्थानीय लोगों के अनुसार बंदरों का यह आक्रामक झुंड अब घरों के अंदर तक घुसने लगा है आलम यह है कि छोटे से लेकर बड़े सामान तक चाहे वह चप्पल जूते हों झाड़ू हो कपड़े लत्ते हों या फिर खाने-पीने का कोई भी सामान बंदर कुछ भी नहीं छोड़ रहे हैं, छतों पर सूखने डाले जाने वाले कपड़े और खाद्य सामग्री उठा ले जाना इनके लिए आम बात हो गई है, सबसे दुखद और चिंताजनक पहलू यह है कि छोटे बच्चों का घर से बाहर निकलना और खेलना-कूदना पूरी तरह से बंद हो गया है, कई बार बंदर मासूम बच्चों पर अचानक हमला कर देते हैं या उनके हाथ से खाने-पीने की चीजें और खिलौने छीन लेते हैं, बच्चों में इस कदर डर बैठ गया है कि वे छत पर जाना तो दूर अपने ही घर के आंगन या बालकनी में अकेले जाने से भी घबराते हैं।(71).jpg)
सामाजिक कार्यकर्ता शिवम सूर्यवंशी ने विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मासूम बच्चे इस आतंक से सबसे ज्यादा भयभीत हैं, जब बच्चे स्कूल जाते हैं या गली में निकलते हैं तो उन पर बंदरों के झुंड द्वारा हमला करने का खतरा लगातार बना रहता है, यदि जल्द ही प्रशासन ने इन बंदरों को नहीं पकड़ा तो किसी मासूम बच्चे के साथ कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है, उन्होंने जिला प्रशासन और नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का संज्ञान लिया जाए, क्षेत्र में युद्ध स्तर पर विशेष अभियान चलाकर इन बंदरों को पकड़ा जाए ताकि कस्बावासी और नन्हे-मुन्ने बच्चे भयमुक्त होकर अपना जीवन जी सकें और किसी संभावित बड़े हादसे को टाला जा सके ।















