
जोधपुर झाल में प्रवास कर रहीं जलीय पक्षियों की 62 प्रजतियां
जोधपुर झाल में प्रवास कर रहीं जलीय पक्षियों की 62 प्रजतियां
पांच साल की गणना में सर्वाधिक 62 प्रजातियां इस बार रिकार्ड, संकटग्रस्त 9 प्रजातियों भी शामिल
मथुरा। आगरा और मथुरा जनपद की सीमा पर स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड पर एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2025 के अंतर्गत जलीय पक्षियों की गणना की गई, इस दौरान 1335 जलीय पक्षी रिकार्ड किए गए हैँ, जोकि 62 प्रजातियों से जुड़े हैँ, इसमें संकटग्रस्त 9 प्रजातियां भी शामिल हैं, जोधपुर झाल पर एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2025 के अंतर्गत जलीय पक्षियों गणना की गई, इसमें 2 समूहों के 8 विशेषज्ञ सदस्यों ने 3 घंटे में लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गणना का कार्य किया।
वेटलैंड्स इंटरनेशनल के इस गणना में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, वन विभाग और बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी का सहयोग रहा, वेटलैंड इन्टरनेशनल के उत्तर प्रदेश कॉर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देश एवं बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ केपी सिंह के नेतृत्व में निधि यादव, शम्मी सईद, अनुज यादव, अनुज परिहार, सुनीता, आकांक्षा, शिवेंद्र प्रताप, नीलेश यादव, छवि छोंकर श्याम सिंह, अजीत गौतम के सहयोग से गणना हुई। जलीय पक्षियों की गणना में 62 प्रजातियों की पहचान की गई है, जिनमें 29 प्रवासी व 33 स्थानीय प्रजातियां रिकार्ड की गई। इनमें जोधपुर झाल वेटलैंड पर आईयूसीएन की संकटग्रस्त सूची में शामिल 9 प्रजातिया रिकार्ड हुई। इनमें सारस क्रेन, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, पेन्टेड स्टार्क, ओरिएंटल डार्टर, कॉमन पोचार्ड, बूली नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक टेल्ड गोडविट, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल और ब्लैक हेडेड आईबिश शामिल है।
सर्वाधिक मिले बार हेडेड गूज, कॉमन टील व नोर्दन पिनटेल
जोधपुर झाल पर पर बार हेडेड गूज 370, नोर्दन पिनटेल 224 व कॉमन टील 220 के अतिरिक्त गेडवाल, यूरेशियन विजन, नोर्दन शोवलर , पाइड एवोसेट, लिटिल स्टिंट, टैमिनिक स्टिंट, सेन्डपाइपर, वेगटेल, ब्लैक-विंग स्टिल्ट, पर्पल स्वैम्प हैन, कॉमन स्नाइप आदि रिकार्ड किए गए
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग की निरंतर निगरानी और सुरक्षा के कारण प्रवासी पक्षियों पर संकट कम होने से इनकी आवक बढ़ गई है। पक्षी विशेषज्ञ डॉ के पी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा नमभूमि के क्षेत्रफल को नये जलीय हेविटाट बनाकर विस्तारित किया गया है। इसके परिणाम स्वरूप वेटलैंड पर निर्भर प्रजातियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।