धान की जगह बाजरा की खेती करने की किसानों को सलाह
धान की जगह बाजरा की खेती करने की किसानों को सलाह
मथुरा । जनपद में बाजरे की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, जिले में बाजरा 40 हजार हेक्टेयर से लेकर 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोया और उत्पादित किया जाता है, इस बार बाजरा की खेती का रकबा बढ़ने की संभावना है, बाजरा सरकार की मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने की स्कीम में भी आता है, जनपद में धान की खेती उन क्षेत्रों में भी होती आ रही है जहां पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है, किसान यहां भू गर्भीय जल का दोहन कर धान की खेती करते हैं ।
उप निदेशक कृषि वसंत कुमार दुबे ने बताया है कि जनपद में धान 104604 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होता है, प्रयास यह है कि इसे घटा कर 75230 हेक्टेयर तक लाया जाए जिससे किसानों के लिए रिस्क को कम किया जा सके, हालांकि किसान अभी से धान की अगेती खेती की तैयारी में जुट गये हैं, इस बार धान उत्पादक किसानों को लिए मौसम की मार भारी पड सकती है, मौसम विभाग की ओर से इस बार अल नीनो का अलर्ट जारी किया गया है, प्रदेश में सूखे के दृष्टिगत 18 जिले अति संवेदनशील हैं जिनमें मथुरा भी शामिल है।
ऐसे में कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएगा और उनको कम वर्षा या कम नमी वाली दलहन तिलहन फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा, इस बारे में जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली प्रजातियों की जानकारी दी जाएगी, बाजरा, ज्वार, मूंग एवं उर्द की प्राथमिकता दी जाएगी, कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक रविंद्र राजपूत ने बताया कि वैज्ञानिक विधि के अनुरूप सिंचाई करें और लगातार खेतों में पानी भरे रहने अच्छा है कि ट्यूबवैल से पानी तब भरा जाए, जब खेत एक दिन सूख जाए ।







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