उपेक्षा पर व्यापारियों का फूटा आक्रोश, नगर आयुक्त से तीखी बहस
उपेक्षा पर व्यापारियों का फूटा आक्रोश, नगर आयुक्त से तीखी बहस
मथुरा । मंगलवार को नगर निगम में हुई महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त सौरभ सिंह के समक्ष व्यापारियों की वर्षों पुरानी समस्याओं को मजबूती से उठाया, संगठन के महानगर अध्यक्ष जितेंद्र प्रजापति ने कहा कि व्यापारियों को पिछले कई वर्षों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं जबकि उनकी मूलभूत समस्याओं का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है ।
बैठक में बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों की कमी, पार्किंग व्यवस्था का अभाव, पार्किंग स्थलों को कूड़ाघर में तब्दील कर देना, बाजारों में फैली गंदगी एवं दुर्गंध, व्यापारियों को मजबूरन दुकानें बंद करने की नौबत, मंडी समिति क्षेत्र में वर्षों से अधूरा पड़ा डिवाइडर, अतिक्रमण के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न तथा अधिकारियों के बार बार स्थानांतरण के कारण समस्याओं का लगातार लंबित रहना जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया ।
महानगर अध्यक्ष जितेंद्र प्रजापति ने नगर आयुक्त से सवाल किया कि जब व्यापारी वर्षों से इन समस्याओं को उठा रहे हैं तो आखिर उनका समाधान क्यों नहीं किया गया, कहा कि प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा व्यापारी वर्ग भुगत रहा है, गंदगी, अव्यवस्था और सुविधाओं के अभाव में व्यापार प्रभावित हो रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासनों तक सीमित हैं, बैठक के दौरान व्यापारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर चर्चा के समय माहौल गर्म हो गया और नगर आयुक्त एवं महानगर अध्यक्ष के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी हुई, संगठन ने स्पष्ट कहा कि व्यापारियों की जायज मांगों को अनदेखा नहीं किया जा सकता और अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए ।
बैठक में मनोनीत पार्षद प्रकाश अग्रवाल, महानगर वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप अरोड़ा (पूर्व पार्षद), महामंत्री सुरेंद्र सैनी, महानगर युवा अध्यक्ष प्रदीप चाहर, महामंत्री अशोक वर्मा, आर्य समाज रोड अध्यक्ष अर्पित जादौन, पार्षद गुलशन कुमार, उपाध्यक्ष राहुल बंसल सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं भारी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे, व्यापारियों ने एक स्वर में अपनी समस्याओं का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग की, संगठन ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो संगठन व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। व्यापारी सम्मान के साथ व्यापार करना चाहता है, उत्पीड़न सहना नहीं, अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए ।







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