दीनदयाल की धरा पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय कवि सम्मेलन
दीनदयाल की धरा पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय कवि सम्मेलन
फरह । दीनदयाल की धरा मुग्धित थी कवियों की रचनाओं की महक से, एक से बढ़कर एक रचनाओं ने हर किसी को गुदगुदाया और हँसाया, मौका था पंडित दीनदयाल स्मृति महोत्सव के दूसरे कवि सम्मेलन का, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दूर दूर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से धाम को गुंजित कर दिया, राजस्थान से आए दीपेंद्र ने समसामयिक समस्या .... दुनियां वाले सोच रहे लड़की रील बनाती प्रस्तुत की तो लोगो की आंखें नम हो गई ।.png)
उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसके दुष्परिणाम को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया, प्रसिद्ध कवि विष्णु सक्सेना ने अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से कवि सम्मेलन में प्रेम और संवेदनाओं के रंग भर दिए, ऋतुओं के बदलते रंग, प्रेम की बेचौनी और दिल की अनकही भावनाओं को उन्होंने अपनी कविता में खूबसूरती से पिरोया, उनकी पंक्ति “मैं तुम्हें सौंप दूंगा तुम्हारी धरा, तुम मुझे मेरे पंखों को आकाश देना” ने श्रोताओं को खूब सराहा, राजस्थान से आए दूसरे कवि ने मै कोई कवि तो नहीं, रचना ने श्रोताओं की वाही वाही बटोरी ।
कवि अजातशत्रु, सचिन सारस्वत के काव्य पाठ ने भी श्रोताओं को लोटपोट किया, कार्यक्रम से पूर्व पंडित दीनदयाल प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जगमोहन पाठक, राजेंद्र प्रसाद, महिपाल सिंह ने पटुका पहनाकर स्वागत किया, कवि सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, महोत्सव समिति अध्यक्ष एड. सोहन लाल शर्मा, मंत्री मनीष अग्रवाल रावी, कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक, कार्यक्रम संयोजक जगमोहन पाठक, राजेंद्र शर्मा, उमेश शर्मा, महीपाल, मोनू तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे ।













