संतों और भजन गायकों के भक्ति रस में सराबोर हुए श्रोता
संतों और भजन गायकों के भक्ति रस में सराबोर हुए श्रोता
वृंदावन (मथुरा) । गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी परिसर स्थित स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में स्वामी हरिदास जी के पदों के गायन का भव्य आयोजन किया गया, इस कार्यक्रम में संतों, भजन गायकों और गुरुकुल के बटुकों ने स्वामी हरिदास जी की पद गायन परंपरा को स्वरांजलि अर्पित की, आयोजन के माध्यम से स्वामी हरिदास जी की समृद्ध पद गायन परंपरा और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया गया ।(3).jpg)
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी हरिदास पीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू महाराज ने की, स्वामी जी ने पद--अति भली भई नित्य ललिता जू प्रगटी, भाग्य हमारे जागेरी......गायन करके सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया, उन्होंने स्वामी हरिदास जी की जीवन पर प्रकाश डाला, भजन सम्राट विष्णु बावरा ने गाया--लड़ेंहती अब तो विलंब न की जाए......., प्रिया शरण जी ने गया--येरी मैरो वृन्दावन सुख धाम.....इस अवसर पर कैलाश नगर स्थित अनमोल गुरुकुलम के बटुकों ने गुरुकुलम के संस्थापक अनमोल महाराज के सानिध्य में सहभागिता की, कार्यक्रम में अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। (3).jpg)
पद गायन परंपरा से जुड़े भजन गायक मोहिनी विहारी शरण महाराज, रंगीली कुंज के प्रिया शरण महाराज, विष्णु बावरा, अनमोल महाराज, महामंडलेश्वर चंद्रमा दास महाराज, बलराम आचार्य महाराज के अलावा कथा वाचक व भजन गायिका मोहिनी कृष्ण दासी, शिवम दास तथा संत पंडित धर्मवीर सहित अन्य कलाकारों ने स्वामी हरिदास के अन्य पदों का भावपूर्ण गायन किया, भजन प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, कार्यक्रम में संगीत की संगत गीता शोध संस्थान के संगीत प्रशिक्षक आकाश शर्मा, सुनील पाठक, मन मोहन कौशिक, रितु सिंह व मानसो राजपूत ने दी, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ0 उमेश चंद्र शर्मा, दूधनाथ के अलावा अकादमी के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने संत व भजन गायकों का पटुका पहनाकर अभिनंदन किया ।














