बाबूगढ़ सकराया में बेखौफ अवैध खनन जारी, प्रशासनिक दावों की खुली पोल
बाबूगढ़ सकराया में बेखौफ अवैध खनन जारी, प्रशासनिक दावों की खुली पोल
चौमुहां (मथुरा) । प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध के दावों को थाना जैंत क्षेत्र ठेंगा दिखा रहा है, क्षेत्र के गांव बाबूगढ़ सकराया में इन दिनों अवैध बालू (रेत) का खनन बड़े पैमाने पर और जोरों-शोरों से जारी है, हैरत की बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है, ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में सक्रिय खनन सिंडिकेट बिना किसी डर के दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों के जरिए बालू का अवैध खनन कर रहा है ।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के प्राकृतिक संसाधनों और रास्तों को बर्बाद होते देख जब भी ग्रामवासी इन्हें रोकने का प्रयास करते हैं या मना करते हैं तो खनन माफिया बेहद दबंगई से पेश आते हैं, अधिकारियों को पैसे दिए हैं, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकताश्पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने खनन माफियाओं का पुरजोर विरोध किया तो उन्होंने सरेआम धमकी भरे लहजे में कहा, हमसे ऊपर से लेकर नीचे तक सभी संबंधित अधिकारियों को मोटी रकम (पैसा) दे रखी है, हमारा काम ऐसे ही चलेगा, जिसे जो करना है कर ले, खनन माफियाओं का यह कबूलनामा क्षेत्र में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यही वजह है कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बाद भी आज तक मौके पर कोई ठोस कार्रवाई करने नहीं पहुंचा, बिना किसी वैध पट्टे और रॉयल्टी के हो रहे इस अवैध बालू खनन से न सिर्फ सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण और भूजल स्तर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, भारी-भरकम वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें टूट चुकी हैं और हर समय हादसे का डर बना रहता है, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि स्थानीय स्तर पर सांठगांठ कर चुके दोषी अधिकारियों और खनन माफियाओं के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध खनन को पूरी तरह बंद नहीं कराया गया और माफियाओं की गिरफ्तारियां नहीं हुईं तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव कर आंदोलन करने को विवश होंगे ।







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